

बलौदाबाजार।
जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र की वास्तविक तस्वीर एक बार फिर सामने आ गई है। छत्तीसगढ़ में लगातार निजी अस्पतालों की मनमानी, नर्सिंग एक्ट के उल्लंघन और मरीजों के शोषण की खबरें उजागर हो रही हैं। कई जिलों में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए निजी अस्पतालों के लाइसेंस रद्द कर उन्हें सील भी किया है। इसी कड़ी में बलौदाबाजार जिले का ओमकार हॉस्पिटल अब सीधे स्वास्थ्य मंत्री तक पहुँच चुका है।
जिला बलौदाबाजार प्रेस क्लब ने आज सर्किट हाउस में छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को ज्ञापन सौंपते हुए ओमकार हॉस्पिटल की कार्यप्रणाली से अवगत कराया। ज्ञापन में बताया गया कि किस प्रकार अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। इलाज से मना करने या डिस्चार्ज की मांग करने पर मरीजों से बेहिसाब वसूली की जाती है, जिसकी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
प्रेस क्लब ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन खुलेआम नर्सिंग होम एक्ट की धज्जियां उड़ा रहा है। न तो स्वास्थ्य विभाग के साथ हुए अनुबंधों का पालन किया जा रहा है और न ही शासन की योजनाओं के अनुरूप सेवाएं दी जा रही हैं। व्यवस्थाएं अव्यवस्थित हैं, संसाधन अधूरे हैं और जवाबदेही पूरी तरह नदारद नजर आती है।
जब इस पूरे मामले को लेकर प्रेस क्लब और पत्रकारों ने आवाज उठाई और खबरें प्रकाशित हुईं, तो उल्टा अस्पताल प्रबंधन द्वारा पत्रकारों को झूठे मामलों में फंसाने का प्रयास किया गया। इस संबंध में प्रार्थी राधेलाल पटेल, गिरौधपुरी द्वारा लिखित शिकायत भी दर्ज कराई गई है। शिकायत के साथ लगभग 22 मिनट की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सामने आई है, जिसमें अस्पताल की मानसिकता और कार्यशैली की पोल खुलकर सामने आ जाती है।
लगातार मिल रही शिकायतों और गंभीर आरोपों को देखते हुए जिला प्रेस क्लब बलौदाबाजार ने स्वास्थ्य मंत्री से ओमकार हॉस्पिटल के खिलाफ निष्पक्ष और विधिवत जांच की मांग की। मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मामले की गंभीरता को समझते हुए मौके पर ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश अवस्थी को तलब किया और ओमकार हॉस्पिटल के खिलाफ चल रही जांच की शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्वास्थ्य मंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बाद प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। बीते चार महीनों से लगातार चल रही शिकायतों के बावजूद जांच लंबित क्यों है? अब तक क्या कार्यवाही हुई? रिपोर्ट कब तक तैयार होकर शासन को भेजी जाएगी?
जनता की निगाहें टिकी हैं—क्या इस बार मरीजों के दर्द को इंसाफ मिलेगा या फिर फाइलों में ही दबकर रह जाएगी एक और शिकायत।






